नून अऊ अंजोर
13 "तुमन धरती के नून अव। पर कहूं नून ह अपन सुवाद ला गंवा देथे, त कोनो किसम ले येला फेर नूनचूर नइं करे जा सकय। येह कोनो काम के नइं रह जावय। येला बाहिर फटिक दिये जाथे अऊ येह मनखेमन के गोड़ तरी रऊंदे जाथे।
14 "तुमन संसार के अंजोर अव। पहाड़ ऊपर बसे सहर ह छिपे नइं रह सकय। 15 अऊ न तो मनखेमन दीया ला बारके बड़े कटोरा के खाल्हे म रखथें, पर दीया ला दीवट ऊपर मढ़ाथें, जिहां ले येह घर के हर एक जन ला अंजोर देथे। 16 ओही किसम ले, तुम्हर अंजोर ह मनखेमन के आघू म चमकय, ताकि ओमन तुम्हर बने काम ला देखंय अऊ स्वरग म रहइया तुम्हर ददा के बड़ई करंय।