22 पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि यदि कोनो अपन भाई ऊपर गुस्सा करथे, त ओह दंड के भागी होही। जऊन कोनो अपन भाई के बेजत्ती करथे, त ओला धरम महासभा के आघू म जबाब देना पड़ही। पर जऊन कोनो अपन भाई ला कहिथे, ‘ए मुरूख!’ ओह नरक के आगी म पड़े के खतरा म होही।
29 कहूं तोर जेवनी आंखी ह तोर पाप म गिरे के कारन बनथे, त ओला निकालके फटिक दे। तोर बर येह बने अय कि अपन देहें के एक ठन अंग ला गंवा दे, पर तोर जम्मो देहें ह नरक म झन डारे जावय। 30 अऊ कहूं तोर जेवनी हांथ ह तोर पाप म गिरे के कारन बनथे, त ओला काटके फटिक दे। तोर बर येह बने अय कि अपन देहें के एक ठन अंग ला गंवा दे, पर तोर जम्मो देहें ह नरक म झन चले जावय।
तलाक
(मत्ती 19:9; मरकुस 10:11-12; लूका 16:18)