45 ताकि तुमन अपन स्वरगीय ददा के संतान हो जावव। ओह खराप अऊ बने दूनों मनखेमन ऊपर अपन सूरज चमकाथे, अऊ धरमी अऊ अधरमी दूनों के ऊपर पानी बरसाथे। 46 यदि तुमन ओमन ले मया करथव, जऊन मन तुम्हर ले मया करथें, त तुमन ला का ईनाम मिलही? का लगान लेवइया पापीमन घलो अइसने ही नइं करंय? 47 यदि तुमन सिरिप अपन भाईमन ला ही जोहार करथव, त आने मन ले तुमन का बड़े बुता करथव? का आनजातमन घलो अइसने नइं करंय?
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