11 हमन ला हर दिन के सहीं आज के भोजन दे।
25 "एकरसेति, मेंह तुमन ला कहत हंव कि तुमन अपन जिनगी के बारे म चिंता झन करव कि तुमन का खाहू या का पीहू, अऊ न अपन देहें के बारे म चिंता करव कि तुमन का पहिरहू। का जिनगी ह भोजन ले जादा महत्व के नो हय? अऊ देहें ह ओनहा ले बढ़के नो हय? 26 अकास के चिरईमन ला देखव; ओमन न कुछू बोवंय, न लुवंय अऊ न कोठार म जमा करंय; तभो ले तुम्हर स्वरगीय ददा ह ओमन ला खवाथे। का तुमन चिरईमन ले जादा महत्व के नो हव?
28 "तुमन ओनहा बर काबर चिंता करथव? खेत के जंगली फूलमन ला देखव कि ओमन कइसने बाढ़थें। ओमन न तो मेहनत करंय अऊ न ही ओनहा बिनंय। 34 एकरसेति, कल के चिंता झन करव, काबरकि कल के दिन ह अपन चिंता खुद कर लीही। आज के दुख ह आज खातिर बहुंते हवय।