2 "एकरसेति, जब तुमन जरूरतमंद मनखे ला देथव, त डुगडुगी झन पीटवाव, जइसने कि ढोंगी मनखेमन यहूदीमन के सभा-घर अऊ गलीमन म करथें, ताकि मनखेमन ओमन के बड़ई करंय। मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि ओमन अपन जम्मो ईनाम पा गीन। 3 पर जब तुमन जरूरतमंद मनखे ला देथव, त तुम्हर डेरी हांथ ये बात ला झन जानय कि तुम्हर जेवनी हांथ का करत हवय। 4 तुम्हर दान ह गुपत म रहय। तब तुम्हर स्वरगीय ददा, जऊन ह गुपत म करे गय काम ला घलो देखथे, तुमन ला ईनाम दीही।
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