25 "एकरसेति, मेंह तुमन ला कहत हंव कि तुमन अपन जिनगी के बारे म चिंता झन करव कि तुमन का खाहू या का पीहू, अऊ न अपन देहें के बारे म चिंता करव कि तुमन का पहिरहू। का जिनगी ह भोजन ले जादा महत्व के नो हय? अऊ देहें ह ओनहा ले बढ़के नो हय? 26 अकास के चिरईमन ला देखव; ओमन न कुछू बोवंय, न लुवंय अऊ न कोठार म जमा करंय; तभो ले तुम्हर स्वरगीय ददा ह ओमन ला खवाथे। का तुमन चिरईमन ले जादा महत्व के नो हव?
31 एकरसेति तुमन चिंता झन करव अऊ ये झन कहव कि हमन का खाबो? या का पीबो? या का पहिरबो? 32 आनजातमन ये जम्मो चीज के खोज म रहिथें। तुम्हर स्वरगीय ददा ह जानथे कि तुमन ला ये जम्मो चीजमन के जरूरत हवय। 33 पहिली परमेसर के राज अऊ ओकर धरमीपन के खोज करव, त ये जम्मो चीजमन घलो संग म तुमन ला दिये जाही। 34 एकरसेति, कल के चिंता झन करव, काबरकि कल के दिन ह अपन चिंता खुद कर लीही। आज के दुख ह आज खातिर बहुंते हवय।