34 एकरसेति, कल के चिंता झन करव, काबरकि कल के दिन ह अपन चिंता खुद कर लीही। आज के दुख ह आज खातिर बहुंते हवय।
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34 एकरसेति, कल के चिंता झन करव, काबरकि कल के दिन ह अपन चिंता खुद कर लीही। आज के दुख ह आज खातिर बहुंते हवय।
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