15 "लबरा अगमजानीमन ले सचेत रहव। ओमन भेड़ के भेस म तुम्हर करा आथें, पर भीतर ले ओमन भयंकर भेड़िया अंय। 16 ओमन के काम के दुवारा ओमन ला तुमन चिन डारहू। का मनखेमन कंटिली झाड़ी ले अंगूर या ऊंटकटारा झाड़ी ले अंजीर के फर टोरथें? 17 ओही किसम ले बने रूख ह बने फर देथे, अऊ खराप रूख ह खराप फर देथे। 18 बने रूख ह खराप फर नइं दे सकय अऊ न ही खराप रूख बने फर दे सकथे। 19 हर ओ रूख जऊन ह बने फर नइं देवय, काटे अऊ आगी म झोंके जाथे। 20 ये किसम ले, ओमन के फर के दुवारा, तुमन ओमन ला चिन डारहू।
सच्चा अऊ लबरा चेला
21 "जऊन मन मोला, ‘हे परभू! हे परभू!’ कहिथें, ओमन म ले जम्मो झन स्वरग के राज म नइं जा सकंय, पर जऊन ह स्वरग म रहइया मोर ददा के ईछा ला पूरा करथे, सिरिप ओहीच ह स्वरग के राज म जाही। 22 नियाय के दिन म कतको मनखेमन मोला कहिहीं, ‘हे परभू! हे परभू! का हमन तोर नांव म अगमबानी नइं करेंन? का हमन तोर नांव म परेत आतमामन ला नइं निकालेंन? अऊ तोर नांव म कतको अचरज के काम नइं करेंन?’ 23 तब मेंह ओमन ला साफ-साफ बता दूहूं, ‘मेंह तुमन ला कभू नइं जानेंव। हे कुकरमीमन हो, मोर ले दूरिहा हटव।’
घर बनइया दू झन मनखे: बुद्धिमान अऊ मुरूख
(लूका 6:47-49)