घर बनइया दू झन मनखे: बुद्धिमान अऊ मुरूख
24 "एकरसेति, जऊन ह मोर ये गोठमन ला सुनथे अऊ ओकर पालन करथे, ओह ओ बुद्धिमान मनखे सहीं अय, जऊन ह चट्टान ऊपर अपन घर बनाईस। 25 पानी बरसिस, नदीमन म पूरा आईस, गरेर चलिस, अऊ ओ घर ले टकराईस, तभो ले ओ घर ह नइं गिरिस, काबरकि ओकर नीव ह चट्टान ऊपर डारे गे रिहिस।