33 तुम्हर बिसवासघात के कारन, तुम्हर लइकामन चालीस बछर तक दुख भोगत इहां चरवाहा होके रहिहीं, जब तक कि तुम्हर आखिरी जन ये सुन्ना जगह म मर नइं जाही। 34 तुमन चालीस दिन तक ओ देस के खोजबीन करे रहेव—एक दिन के पाछू एक साल याने कि चालीस साल तक तुमन अपन पाप के दुख भोगहू, तब तुमन जानहू कि मोर बिरूध होय के मतलब का होथे।’
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