1 एकरसत, ह भईमन ह! परमसर क दय क करन, मह तमहर ल बनत करत हव क अपन दह ल जयत बलदन क रप म परमसर ल द दव अऊ अपनआप ल नसकलक बनक परमसर क अइसन सव करव क ओह खस हवय—एहच ह परमसर बर तमहर सह अरधन अय। 2 तमन य ससर क मनखमन सह झन बनव, पर तमन क मन ह नव ह जय क करन, तमहर चलचलन घल बदल जवय। तब तमन परमसर क ओ ईछ ल परखक जन सकह जऊन ह बन, मनभवन अऊ सदध अय।
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