अधिकारीमन के अधीन रहई
1 हर एक मनखे सासन करइया अधिकारीमन के अधीन रहय, काबरकि परमेसर कोति ले अधिकार दिये जाथे। अभी जऊन अधिकार हवय, ओह परमेसर के दुवारा दिये गे हवय। 2 एकरसेति, जऊन ह अधिकार के बिरोध करथे, ओह परमेसर के ठहिराय अधिकार के बिरोध करथे अऊ अइसने मनखे ह अपन ऊपर दंड लानथे। 3 जऊन ह सही काम करथे, ओकर ऊपर अधिकारी के भय नइं रहय, पर जऊन ह गलत काम करथे, ओकर ऊपर अधिकारी के डर बने रहिथे। का तुमन अधिकारी के भय ले मुक्त होय चाहथव? त फेर सही काम करव अऊ ओह तुम्हर बड़ई करही। 4 काबरकि ओह तुम्हर भलई खातिर परमेसर के सेवक अय। पर यदि तुमन गलत करथव, त ओकर ले डरव, काबरकि ओला बेकार म अधिकार नइं दिये गे हवय। ओह परमेसर के दास ए अऊ कुकरमीमन ला दंड देथे।