12 एकरसेति, हमन ले हर एक झन परमेसर ला अपन काम के लेखा-जोखा दीही।
आने मन के पाप म पड़े के कारन झन बनव
13 एकरसेति, हमन एक-दूसर के ऊपर दोस झन लगावन। पर अपन मन म, ये ठान लेवन कि हमन न तो अपन भाई के रसता म कोनो बाधा डालन अऊ न ही ओकर पाप म पड़े के कारन बनन। 14 मेंह जानत हंव अऊ परभू यीसू के संगति म रहे के कारन मोला पूरा बिसवास हवय कि कोनो चीज ह अपनआप म असुध नइं होवय। पर कहूं कोनो मनखे कोनो चीज ला असुध समझथे, त फेर ओकर बर ओह असुध अय।