11 पर नाओमी ह कहिस, "हे मोर बेटीमन, अपन घर लहुंट जावव। तुमन काबर मोर संग म आहू? का मेंह अऊ बेटामन ला जनम देवइया हंव, जऊन मन तुम्हर घरवाला होहीं? 12 हे मोर बेटीमन, अपन घर लहुंट जावव; काबरकि मेंह तो अपन खातिर अऊ कोनो घरवाला बनाय बर बहुंत डोकरी हो गे हवंव। चाहे यदि मेंह सोचंव भी कि अभी घलो मोर बर आसा हवय—अऊ यदि आज रथिया मोर कोनो घरवाला हो जावय अऊ मोर बेटामन घलो जनमंय— 13 त का तुमन ओमन के जवान होवत तक इंतजार करहू? का ओमन बर बिगर बिहाव करे ठहिरे रहिहू? हे मोर बेटीमन, अइसने झन होवय। मोर दुख ह तुम्हर दुख ले जादा बढ़के अय, काबरकि यहोवा के हांथ ह मोर बिरूध म उठे हवय!"