14 यहोवा के भयानक दिन ह लकठा म हवय—
येह लकठा म हवय अऊ जल्दी आवत हे।
यहोवा के दिन के रोवई ह भयंकर ए;
बड़े बीर घलो दुख के मारे चिचियाथे।
15 ओ दिन ह कोप के दिन होही—
संकट अऊ पीरा के दिन,
समस्या अऊ बिनास के दिन,
अंधियार अऊ उदासी के दिन,
करिया बादर अऊ अंधियार के दिन होही—
16 गढ़वाले सहरमन के बिरूध
अऊ कोनटा के मीनारमन के बिरूध
ओह तुरही फूंके अऊ लड़ई के ललकार के दिन होही।
17 "मेंह जम्मो मनखेमन ऊपर अइसन बिपत्ति लानहूं
कि ओमन अंधरा मनखे कस टमड़हीं,
काबरकि ओमन यहोवा के बिरोध म पाप करे हवंय।
ओमन के लहू ला धुर्रा कस
अऊ ओमन के अंतड़ी ला गोबर कस फटिक दिये जाही।
18 यहोवा के कोप के दिन
न तो ओमन के सोन
अऊ न ही ओमन के चांदी ओमन ला बचा सकही।"
ओकर जलन के आगी म
जम्मो धरती ह भसम हो जाही,
काबरकि ओह ओ जम्मो के अचानक अन्त कर दीही
जेमन धरती म रहिथें।