19 हे मोर मयारू भाईमन, ये गोठ ला तुमन जान लेवव: हर एक मनखे पहिली धियान देके सुनय अऊ धीर धरके बोलय अऊ तुरते गुस्सा झन होवय, 20 काबरकि मनखे के गुस्सा ह परमेसर के धरमीपन नइं लाने सकय।
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19 हे मोर मयारू भाईमन, ये गोठ ला तुमन जान लेवव: हर एक मनखे पहिली धियान देके सुनय अऊ धीर धरके बोलय अऊ तुरते गुस्सा झन होवय, 20 काबरकि मनखे के गुस्सा ह परमेसर के धरमीपन नइं लाने सकय।