14 पर कहूं तुमन अपन मन म भारी जलन अऊ सुवारथ रखथव, त एकर बर घमंड झन करव अऊ सत के बिरोध झन करव। 15 अइसने बुद्धि ह स्वरग ले नइं आवय, पर येह संसारिक, सारीरिक अऊ सैतान के अय। 16 काबरकि जिहां जलन अऊ सुवारथ होथे, उहां झंझट अऊ हर किसम के बुरई पाय जाथे।
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