घमंड के बिरोध म चेतउनी
13 सुनव, तुमन जऊन मन ये कहिथव कि आज या कल हमन कोनो अऊ सहर म जाके उहां एक बछर रहिबो, अऊ काम-धंधा करके पईसा कमाबो। 14 तुमन ये नइं जानत हव कि कल का होही। तुम्हर जिनगी ह का ए? तुमन त भाप के सहीं अव, जऊन ह छिन भर दिखथे, अऊ तब लोप हो जाथे। 15 एकर बदले, तुमन ला ये कहना चाही कि कहूं परभू के ईछा होही, त हमन जीयत रहिबो अऊ ये या ओ बुता ला करबो।