5 तम्हैं निं एकी-दुजै का ज़ुदै रही, पर सिधअ थोल़ी घल़ी सका आप्पू मांझ़ै सैहमती दी सका ज़ुदै हई, ताकि प्राथणां करना लै किछ़ बगत भेटी सके, अर तेखअ रहै भिई संघा, राख्सा निं आप्पू परखणैं दैई नांईं ता तम्हां हणीं आपणीं देहीए भुख आपणैं बशै करनी कठण।
5 तम्हैं निं एकी-दुजै का ज़ुदै रही, पर सिधअ थोल़ी घल़ी सका आप्पू मांझ़ै सैहमती दी सका ज़ुदै हई, ताकि प्राथणां करना लै किछ़ बगत भेटी सके, अर तेखअ रहै भिई संघा, राख्सा निं आप्पू परखणैं दैई नांईं ता तम्हां हणीं आपणीं देहीए भुख आपणैं बशै करनी कठण।