मरियम को गाना
46 एको पर मरियम असो गावन लगी,
"मोरी जीव (मन) पिरभु को गुन-गान करासे।" 47 मोरो जीव, आपरो मुक्ती देवन वालो,
परमेस्वर को खुसी मनावसे। 48 काहे का वोना आपरो सेविका को गरीबी पर,
किरपा करीसेस। अब लक सब पीड़ी,
मोला धन्य कहेति। 49 काहे का, गजब सक्तिसाली परमेस्वर ना,
मोरो लाय मोठयो काम करीसेस,
पवीतर से वोको नाव।