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लूका 2

िकर

41 य-बहर बलिि2:41 बलिदान को तिहार मनवन ा, सलनगर वत तयो। 42 जबभयो, तबआपरलक, िमनवन ी, सलनगर गईन43 ि, वन ा, लवट गईन, करसलरह गयो, य-बनहनत 44 वय समझत ा, तरदलमएकएक िवस तरकरन ा, आपरअखन-पहचकगढ-ढकरन लग45 जब उनलनहलयो, तब ुंढत-ढडत सलनगर ि46 िवस ा, उनलििो। बसका, धरम लक सवल-जवकरत गयो। 47 सब आयकन ा, अकअखसवल-जवपर चकभई गईन48 य-बवका, अचभई गइनकह, "ा, आमरअसकर? , अखी, ि, अखि"

49 तब कवहयो, "ढ-ढकरो? नहनसो, पको, आपरघर रहू।" 50 पर ी, समझ नहआयो।

51 उनकसलनगर लक आपरघर सरत नगर आयो। अख, आपरय-बआधरहयो। सब आपरमन ा, सज52 अकअनकत2:52 आयु ा, अखपरमवर अनिरपबढतगयो।

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