परमेस्वर के दास
11 मैं तुमसे, प्रिय दोस्तौ, जौ दुनिया मैं अजनबी और परदेसी होन की बजह से नहोरे करथौं! कि सारीरिक मन की चीज के इच्छा के अग्गु मत झुकियो, जो हमेसा आत्मा के खिलाप युद्ध मैं रहथै।
11 मैं तुमसे, प्रिय दोस्तौ, जौ दुनिया मैं अजनबी और परदेसी होन की बजह से नहोरे करथौं! कि सारीरिक मन की चीज के इच्छा के अग्गु मत झुकियो, जो हमेसा आत्मा के खिलाप युद्ध मैं रहथै।
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