12 और मैं मेम्ना कै छठमीं मुहर खोलत भै देखो। तौ एक बड़ो हालाचाला आओ, और सूरज कम्मर के तराहनी कारो हुई गौ, और जोनी पूरी खून के तराहनी लाल हुई गई। 13 और आसमान के तारा पृथ्वी मैं गिर पड़े, जैसे बड़ी आँधी से हिलकै अंजीर के पेंड़ मैं से कच्चे फल झरथैं।6:13 यसायाह 34:4 14 आसमान एक जिंदगी की किताब के तराहनी लुढ़काओ गौ, और हर एक पहाड़ और टापू, अपने-अपने जघा से सरक गै। 15 तब पृथ्वी के राजा, और प्रधान, और सरदार, और धनवान और सामर्थी लोग, और हर एक दास, और हर एक स्वतंत्र, पहाड़न की गुफा और चट्टानन मैं जाएकै लुक गै। 16 और पहाड़न, और चट्टानन से पुकारकै कहेन लागे, "हमरे ऊपर गिर पड़ौ; और हमैं बाके सिंहासन मैं बैठन बारे की आँखी से और मेम्ना के प्रकोप से लुकाए लियौ! 17 काहैकि उनके प्रकोप को भयानक दिन आए पहुँचो है, अब बाको सामना कौन कर सकथै?"
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