साऊल को धर्म परिवर्तन
1 साऊल अपने चेला जो प्रभु के चेलन के खिलाप मार डारन की धमकी दई। जौ बीच बौ बड़ो पुजारी के झोने गौ धमकान और घात करन के ताक मैं रहत रहै। 2 और बासे दमिस्क नाओं के सभाघर से जौ अधिकार को दस्तावेज माँगी कि आदमी का बईय्यर, जिनकै बौ परमेस्वर के रहामैं पाबै तौ उनकै पकड़कै यरूसलेम मैं लै आबै।
3 जैसे-जैसे साऊल दमिस्क सहर के झोने आत गौ, अनकाचीति आसमान से बाके ऊपर एक उजियारो चमको। 4 बौ जमीन मैं गिर गौ और बाकै एक अबाज सुनाई दई, "साऊल, साऊल! तू मोकै काहेकै सताथै?"
5 बौ पूँछी, "प्रभु तैं कौन है?" अबाज कही, "मैं ईसु हौं; जोकै तू सताथौ।" 6 "लेकिन अब उठकै और सहर मैं जा, जहाँ तोकै बताओ जागो कि तोकै का करनो चाहिए।"
7 जो आदमी साऊल के संग सफर करत रहैं, बे चकाय गै, काहैकि बे अबाज कै सुनत तौ रहैं, लेकिन कोई कै देख नाय पात रहै। 8 तौ साऊल जमीन मैं से उठो, लेकिन जब आँखी खोली तौ बाकै कछु सुजान ना लगो। जहे बजह से बे बाको हात पकड़कै दमिस्क मैं लैगै। 9 बौ तीन दिन ले नाय देख सको, और बौ समय साऊल कछु ना खाए पी पाई।