12 तुम परमेस्वर के पवित्र लोग हौ; बौ तुमसे प्यार करथै और तुम्हैं अपने ताहीं चुनी है। इसलै, तुमकै अपने आपकै करुना, भलाई, नमरता, सोम्यता और धीरज पहननो चाहिए। 13 अगर कोई किसी के खिलाप है तौ कोई बजह होबै, तौ एक दुसरे कै सहन कर लेबौ, और एक दुसरे के अपराध कै माफ करौ: जैसे प्रभु तुमरे अपराध कै माफ करी, बैसिये तुम्हऊँ करौ। 14 जे सब गुड़न के ऊपर प्रेम कै जो सिद्धता की कमरबंद है भाँद लेबौ। 15 मसीह की सांति, जोके ताहीं तुम एक सरीर हुईकै बुलाए गै हौ, तुमरे मन मैं राज करै, और तुम धन्यबादी बने रहबौ। 16 मसीह के बचन कै अपने दिल मैं अधिकाई से बसन देबौ; और सिद्ध ग्यान से एक दुसरे कै सिखाबौ, बताबौ, अपने-अपने मन मैं कृतगता और धन्यवाद के संग परमेस्वर के ताहीं गीत, स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाबौ। 17 तुम जो भी कुछ करौ या कहबौ, बौ प्रभु ईसु के नाओं से करौ, और बाके घाँईं से परमेस्वर पिता को धन्यवाद करौ।
नई जिंदगी मैं आपस के सम्बंध
18 अरे बईंय्यरौं, जैसो प्रभु मैं ठीक है, बैसिये अपने-अपने लोगा के अधीन रहबौ। 19 अरे लोगौ, अपनी-अपनी बईय्यर से प्रेम रखौ, और उनसे कठोरता मत करौ। 20 अरे बालकौ सब बातन मैं अपनी अईय्या-दऊवा की आग्या को पालन करौ, काहैकि जासे प्रभु खुस होथै। 21 अरे दउवों अपने बालकन कै भड़काए मत करौ, ऐसो नाय होबै की उनकी हिम्मत टूट जाबै।