15 मसीह की सांति, जोके ताहीं तुम एक सरीर हुईकै बुलाए गै हौ, तुमरे मन मैं राज करै, और तुम धन्यबादी बने रहबौ। 16 मसीह के बचन कै अपने दिल मैं अधिकाई से बसन देबौ; और सिद्ध ग्यान से एक दुसरे कै सिखाबौ, बताबौ, अपने-अपने मन मैं कृतगता और धन्यवाद के संग परमेस्वर के ताहीं गीत, स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाबौ। 17 तुम जो भी कुछ करौ या कहबौ, बौ प्रभु ईसु के नाओं से करौ, और बाके घाँईं से परमेस्वर पिता को धन्यवाद करौ।
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