3 सच्ची मैं हम सबै उन्हईं के तराहनी रहैं और अपनी सरीर की इच्छा के हानी रहेत रहैं। बहे स्वभाव के मन की इच्छा के अनुसार चलत रहैं और दुसरेन के हानी स्वभाविक रीति से परमेस्वर के क्रोध के सिकार बने भै रहैं।
4 लेकिन परमेस्वर की दया इत्तो जद्धे है, और हमरे ताहीं बाको प्रेम इत्तो महान है, 5 कि बौ समय हम अपनी आग्या उलंघन की बजह से मर गै रहैं तौ हमकै मसीह के अनुग्रह से जिंदो करो गौ,