25 जौ बजह से झूठ बोलनो छोड़कै सब अपने परोसिन से सच्ची बोलौ, काहैकि हम आपस मैं एक दुसरे के अंग हैं। 26 अगर तुम गुस्सा हुई जाथौ, तौ अपने गुस्सा मैं आयकै पाप मत करौ, दिन मुदन तक तुमरे गुस्सा न रहबै। 28 अगर तुम चोरी करत रहौ, तौ तुमकै चोरी करनो छोड़ देनो चाहिए और भले काम करनो सुरु कर देनो चाहिए, ताकी तुम अपने ताहीं इमानदारी को जीवन जी सकौ और गरीबन की मदत कर सकौ। 29 कोई गंदे बोल तुमरे मोहों से ना निकरैं लेकिन भलाई की बात निकरै, पर सिरफ अनुग्रह की बढ़ोतरी के हिसाब से बहे बोल निकरै जो तुमरे सुनन बारे को भलो कर सकै, जोसे तुमरे सुनन बारेन कै फायदा होबै। 31 सब तराहनी की कड़वाहट, और राग और गुस्सा से छुटकारा पाबौ, और कोई बदनामी करन बारी बात, कोई तरहन की जद्धे खराब सोच मत पालौ। 32 4:32 कुलुस्सियों 3:13जाके अलावा एक दुसरे के ताहीं दया करन बारे और कोमल मन के रहबौ, और एक दुसरे कै माफ कर दियौ, काहैकि परमेस्वर तुमकै मसीह के जरिये माफ करी है।
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इफिसियों 4:25,26,28,29,31,32
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