जीन ताहीं मसीह है
12 मैं तुमकै जाननो चाहथौं, मेरे भईय्यौ, कि जो चीजैं मेरे संग भइ हैं, बे बास्तव मैं सुसमाचार कै बढ़न मैं मदत करी है। 13 हिंयाँ तक कि, कैसर के पूरे महल के पहरेदार और हिंयाँ के बचे भै सब जनी जानथैं कि मैं कैदखाना के बंधन मैं हौं काहैकि मैं मसीह को सेवक हौं। 14 और मेरे कैदखाना के बंधन मैं रहन से भौत से विस्वासी भईय्या कै प्रभु के ऊपर जाधे बिस्वास हुई गौ है, जोसे बे हमेसा के ताहीं निडर हुईकै उपदेस देथैं।
20 मेरी गहरी इच्छा और आसा है कि मैं अपने काम मैं कहु असफल नाय होमंगो, लेकिन हर समय और खासकर अभै, मैं पूरी हिम्मत से भरो रहमंगो, ताकी मैं अपने पूरे पहचान के संग मसीह को सम्मान दिबामौं, चाँहे मैं जिंदो रहमौं या मेरो सरीर मर क्यू ना जाबै। 21 काहैकि मेरे ताहीं जिंदो रहनो मसीह है, और मर जानो फायदा है।