33 जे बिस्वास के जरिया राज्य जीतीं; धार्मिकता के काम करीं; वादा करी भइ चीज पाई, सेरन को मोहों बन्द करीं, 34 आगी की गर्मी कै ठंडो करी; तलवार की धार से बच निकरे, कमजोरी मैं तगड़े भै; लड़ाई मैं ताकतबर निकरे; विदेसी सिपईय्यन के डेरा कै मार भजाईं।
35 बईंय्यरैं अपने मरे भैन कै फिर जिंदो पाईं; कितने तौ मार खात-खात मर गै; और छुटकारा नाय चाँहीं; काहैकि अच्छी जिंदगी कै पानबारे बनै। 36 दूसरे लोग तौ मजाक मैं उड़ाए जान; और कोड़ा खान; बल्कि भाँदे जान; और कैद मैं पड़न के जरिया परखे गै। 37 पथरा से मारे गै; आरे से चीरे गै; उनकी परिक्छा करी गई; तलवार से मारे गै; बे कंगाली मैं और कलेस मैं और दुख भुगतत भै भेंड़न और बकरियन की खाल ओढ़े भै, इतै-उतै मारे-मारे फिरैं। 38 और जंगलन, पहाड़न, गुफन, और धरती की दरारन मैं भटकत फिरे।
39 दुनिया उनके लायक नाय रहै और बिस्वास के जरिया जे सबन के बारेन मैं अच्छी गभाई दई गई! तहुँओं उनकै बौ चीज नाय मिली जोकी परमेस्वर उनसे वादा करी रहे।