10 बे तौ अपनी-अपनी समझ के मुताबिक थोड़ी दिनन के ताहीं सजा करत रहैं, पर जौ तौ हमरे फायदा के ताहीं करथै, कि हमउँ बाकी पवित्रता के भागी हुई जामैं। 11 और आज के समय मैं हर तरह की सजा खुसी की नाय, बल्किन दुखै की बात सुजाई पड़थै, तहुँओं जो बाकै सहत-सहत पक्के हुईगै है, बाद मैं उनकै चैन के संग धार्मिकता को प्रतिफल मिलथै।