7 तुम दुख कै सजा समझकै सह लेबौ; परमेस्वर तुमकै लौड़ा समझकै तुम्हारे संग बर्ताव करथै, बौ कौन सो लौड़ा है, जोकी सजा दऊवा नाय करथै? 8 अगर बौ सजा जोके भागीदार सब होथैं, तुम्हारी नाय भइ, तौ तुम लौड़ा नाय, बल्किन व्यभिचार के बालका ठहरै!
9 फिर जबकी हमरे इंसानी दऊवा भी हमारी सजा करत रहैं और हम उनको आदर करे, तौ का आत्मन के दऊवा के औरौ संग नाय रहमैं जोसे हम जिंदे रहमैं। 10 बे तौ अपनी-अपनी समझ के मुताबिक थोड़ी दिनन के ताहीं सजा करत रहैं, पर जौ तौ हमरे फायदा के ताहीं करथै, कि हमउँ बाकी पवित्रता के भागी हुई जामैं।