12 तुमकै अबले तौ गुरुजी बन जानो चाहिए रहै। फिर भी जौ जरूरी ही गौ है कि कोई तुमकै परमेस्वर को बचन की सुरुवाती सिक्छा दुबारा से सिखाए। तुम तौ ऐसे बन गै हौ कि अन्न के बदले दूद की जरूरत है। 13 जो कोई भी दूद पीथै, बौ हबै भी बालक है बाकै न्याय के मामले की कोई पहचान ना है। 14 पर अन्न स्यानो के ताहीं है, जिनकी इन्द्रियाँ अभ्यास के जरिया भले-बुरे की पहचान करन मैं सक्छम है।
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