10 जो छोटी बातन मैं बिस्वास योग्य है, बौ बड़ी बातन मैं भी भरोसेमंद रहगो; जो छोटे-छोटे मामलेन मैं अधर्मी है, बौ बड़े मामलेन मैं अधर्मी होगो। 11 अगर, तुम अधर्मी की दौलत कै संभालन मैं भरोसेमंद नाय हौ, तौ तुमरे ऊपर सच्ची दौलत मैं कैसे भरोसो करो जाबै? 12 और अगर तुम पराए की दौलत मैं भरोसेमंद नाय हौ, तौ जो तुमरो है बौ तुम्हैं कौन देगो?
Publicidade