12 और जब बौ हुँआँ के गाँव से निकरो जात रहै तौ बाको भेंटा दस कोहढ़ी आदमी से भइ। बे थोड़ी दूरी मैं ठाड़े रहैं 13 और हूँनै से चिल्लाईं, "ईसु! गुरुजी! हमरे ऊपर दया कर!"
14 ईसु उनकै देखकै उनसे कही, "जाबौ और पुजारी कै अपने आपकै दिखाबौ।" और बे नेंगत-नेंगत कोढ़ से सुद्ध होत चले गै। 15 तभई उनमैं से एक खुदकै देखी कि बौ अच्छो ही गौ है, तौ बौ ऊँची अबाज मैं परमेस्वर की बड़ाँईं करत भै लौटकै आओ। 16 और बौ ईसु के पाओं मैं घुपटियाय कै बाको धन्यवाद करी। और बौ एक सामरी आदमी रहै। 17 ईसु बासे कही, "दस आदमी जो सुद्ध भै रहैं; बाकी नौ कितै गै? 18 जौ परदेसी कै छोड़ और कोई नाय है जो परमेस्वर कै धन्यवाद और महिमा देन के ताहीं आओ है?" 19 और ईसु बासे कहथै, "उठ और जा; तोकै तेरो ही बिस्वास अच्छो करी है।"