18 एक यहूदिन को अधिकारी ईसु से पूँछथै, "अच्छो गुरुजी, अनंत जिंदगी पान के ताहीं मैं का करौं?"
22 जौ सुनकै ईसु, बासे कहथै, तेरे भीतर अभै भी एक कमी की बात है, "तू अपनो सबै कुछ बेंच कै गरीबन मैं बाँट दे, और तोए स्वर्ग मैं धन मिल जागो, और आयकै मेरे पच्छू हुई ले।" 23 लेकिन जौ सुनकै बौ आदमी को मन दुखी हुई गौ, काहैकि बौ आदमी भौत सेठ रहै।
24 ईसु बाकै दुखी देखकै कही, "सेठ और पैसा बारे आदमी को परमेस्वर के राज्य मैं जानो कठिन है! 25 एक ऊँट को सुईं के भार मैं से निकर जानो सहज है लेकिन एक सेठ आदमी को परमेस्वर के राज्य मैं जानो भौत कठिन है।"
26 उनकै सुनन बारे लोग बासे पूँछथैं, "तौ फिर कौनकै बचाओ जाए सकथै?"
27 जो चीज इंसान से नाय हुई सकथै बौ चीज परमेस्वर से हुई सकथै।