25 तौ ईसु उनसे कही, "तुम कितने मूर्ख हौ, भविस्यवक्ता कि हर बात के ऊपर मन मैं बिस्वास करन मैं कितने धीमे हौ! 26 का मसीहा के ताहीं जौ जरूरी नाय रहै कि बौ जे दुखन कै उठाबै और अपनी महिमा मैं आबै?" 27 और ईसु मूसा कि किताब से लैकै सब भविस्यवक्ता जो बाके बारे मैं सास्त्र मैं लिखी रहैं उनकै समझाई।
28 तौ बे बौ गाँव के झोने आए जितै बे जात रहैं, ईसु ऐसो व्यवहार करी कि मानौ बौ अग्गु जात रहै; 29 लेकिन बे कै जौ कहकै रोक लईं कि "हमरे संग रहा; दिन लमसम खतम हुई गौ है और अंधियारो हुई रौ है।" इसलै बौ उनके संग रहन कै चले गौ। 30 बौ उनके संग खानु खान कै बैठगौ, रोटी लई, और आसीस माँग कै धन्यवाद करी; तौ बौ रोटी तोड़कै उनकै दई। 31 तौ उनकी आँखी खुली और बे बाकै पहचान लईं, लेकिन बौ उनकी नजर से गायब हुई गौ। 32 बे आपस मैं कहीं, "का जौ बौ आगी के हानी नाय जो हमरे मन मैं पजरत रहै, जब बौ रस्ता मैं हमसे बतकात रहै, और सास्त्र को मतलब समझात रहै?"