27 "पर मैं तुम सुनन बारेन से कहथौ, कि अपने बैरी से प्यार करौ; जो तुमसे बैर करैं, उनको भलो करौ," 28 जो तुमकै बद्दुआ देबै, तुम उनकै आसीस दियो; जो तुमरी बेजती करैं, उनके ताहीं प्रार्थना करौ। 29 अगर कोई तुमकै एक गलऊवा मैं चाँटा मारै, तौ बाके घाँईं दुसरो गलऊवा रोक लियो; अगर कोई तुमरो कोट लेथै, तौ बाकै अपनो कुरता पहनन देमैं। 30 जो कोई तुमसे कछु मांगथै, बाकै देमैं; और जो तुमरी चीज छीन लेबै, बाकै दुबारा मत माँगियो। 31 दुसरेन ताहीं बहे करैं, जैसो अपने ताहीं चाहथौ, और तुम्हऊँ उनके संग बैसोई करियो।
32 "अगर तुम खाली बे लोगन से प्यार करथौ, जो तुमसे प्यार-भाव रखथैं, तौ तुमकै दुआ काहे मिलनो चाहिए? काहैकि पापी अपने प्रेम-भाव रखन बारेन से प्यार करथैं।" 33 अगर तुम बे लोगन को भलो करथौ, जो तुमरो भलो करथैं, तौ तुमकै दुआ काहेकै मिलनो चाहिए? काहैकि पापी ऐसोई करथैं! 34 और अगर तुम खाली बे लोगन कै उधार देथौ, जिनसे तुम बापस पान की आसा करथौ, तौ तुमकै दुआ काहे मिलनो चाहिए? पापी भी पापिन कै उधार देथैं, ताकी उतनोई पैसा बापस पामैं! 35 न! अपने बैरी से प्यार करौ और उनको भलो करौ; उधार और बापस लेन की कछु उमीद मत करौ, तौ तुमरे पास एक बड़ो इनाम होगो; और तुम परमप्रधान के बालका माने जागे, काहैकि बौ उनके ताहीं जो धन्यवाद नाय देथैं और बुरेन के ताहीं अच्छो है।6:35 लैव्यवस्था 25:35-36; मत्ती 5:44-45 36 दयालु बनौ जैसो तुमरो दऊवा दयालु है।
दुसरेन को न्याय
(मत्ती 7:1-5)