सिमौन फरीसी के घरै ईसु
36 एक फरीसी ईसु कै अपने घरै खानु खान पूँछी; और ईसु बाके घरै गौ और खानु खान कै बैठगौ। 37 बौ सहर मैं एक बईय्यर रहै जो पाप भरी जिंदगी जीत रहै, बौ सुनी कि ईसु फरीसी के घरै खानु खाए रौ है, इसलै संगमरमर की सीसी मैं भरकै इत्तर7:37 महाकनबारी लै आई। 38 और बौ ईसु पच्छू ठाड़कै, रोत भइ, ईसु के पाँव कै आँसु से भिजाये दई, और अपनी मुड़िया के बारन से पछोनन लग्गई और बाके पाँव बार-बार चूमकै उनमैं इत्तर डारकै अभिसेक करी।
47 "मैं तोसे कहथौं; कि जाके पाप जो भौत रहैं, माफ ही गै है, काहैकि जौ भौत प्यार दिखाई है; लेकिन जिनकै माफी मिल गई है बौ थोड़ी सो प्यार दिखाथै।"
48 फिर ईसु बौ बईय्यर से कही, "तेरे पाप माफ ही गै।"
50 लेकिन ईसु बौ बईय्यर से कही, "तेरो बिस्वास तोकै बचाई है; तैं सांति से चली जा।"