ईसु आँधी कै सांत करी
35 बहे दिन जब संजा भइ, तौ बौ चेलन से कही, "आबौ, आपन झील के बौ पाँजर चलैं।" 36 और बे भीड़ कै छोड़कै, ईसु कै नईंयाँ मैं संग लै चल दईं;4:36 मरकुस 3:9; 5:2,21 और बाके संग औरौ नईंयाँ रहैं। 37 तौ अनकाचीति एक बड़ी आँधी आई, और लहरैं नईंयाँ मैं ऐसी टक्कर खामैं, कि पानी से नईंयाँ भरी जाबै। 38 पर ईसु नईंयाँ के पच्छू के सिरा मैं तकिया लगाएकै सोत रहै। तौ ईसु के चेला जाएकै कहीं, "गुरुजी, का तोकै फिकर नाय है कि हम डूबे जाए रै हैं?"
39 तौ फिर ईसु उठकै आँधी कै आग्या दई, और पानी से कही, "सांत हुई जा, रुक जा!" और आँधी रुक गई और सब घाँईं सांति छाए गई। 40 और बौ अपने चेलन से कही, "तुम काहे डराथौ? का तुमकै हबै तक बिस्वास नाय है?"
41 बे गजबै डराय गै और आपस मैं बतकाईं, "जौ कौन है कि आँधी और पानी की लहरैं जाकी बात मानथैं?"