25 एक बईय्यर रहै, जोकै बारह साल से खून बहेन की बिमारी रहै। 26 बौ निरे बैधिन कै दिखाए डारी रहै, और अपनो सबै रुपईया-पैसा उठाए डारी रहै तहुँओं कछु आराम नाय मिलो, लेकिन औरौ जाधे बिमार हुई गई रहै। 27 बौ ईसु के बारे मैं सुनी रहै जहे बजह से भीड़ कै हटात भइ पच्छू से आयकै बाके लत्ता कै छुइ, 28 काहैकि बौ अपने आपकै कहेत रहै, "अगर मैं बाके लत्ता कै छुइ लेंगो, तौ अच्छी ही जांगो।"
29 और तुरंतै बाको खून बहनो बंद ही गौ, और बौ अपनी सरीर मैं महसूस कर लई की मैं बौ बिमारी से ठीक ही गौ हौं। 30 तुरंतै ईसु के भीतर से सामर्थ्य निकरी, तौ बाकै पता लग्गौ कि, कोई तौ मोकै छुओ है। और पच्छू घूमकै भीड़ से पूँछी, "मेरो लत्ता कौन छुओ है?"
31 बाके चेला जबाब दईं, "तैं तौ देखिये रौ है कि तेरे ऊपर भीड़ गिरी जाए रइ है, तहुँओं तू कहथै कि मोकै कौन छुओ?"
32 पर मेरे लत्ता कौन छुओ देखन ताहीं सब घाँईं देखन लगो। 33 बौ बईय्यर सोची मेरे संग अच्छोई भौ है, तौ डरात और थरथरात भइ आई, और बाके गोड़े मैं गिरकै सब कछु उनकै सच-सच कह सुनाई। 34 ईसु बासे कही, "मेरी लौड़िया, तेरो बिस्वास तोकै अच्छो करी है: सांति से जा, और जौ बिमारी से बची रहिये।"