ईसु हजारन कै खानु खबाई
30 प्रेरित लोग ईसु के झोने जुराए गै, जो कछु बे करीं और लोगन कै सिखाईं, सब कछु ईसु कै बताईं। 31 ईसु उनसे कही, "आबौ आपन एक अलग्याँओं जघा मैं जाएकै थोड़ी देर सैंताए लेमैं।" काहैकि हुँआँ भौत आदमी आन जान लग गै रहै, और उनकै तौ खानौ की संकता ना रहै। 32 तभई के मारे बे नईंयाँ से, अलग्याँओं सुनसान जघा मैं चले गै।
33 बहे समय निरे जनी उनकै जात देख डारीं और जानगै कि जे बेईं हैं, और सब नगरन से जुराए कै नेंगतै-नेंगत ईसु और बाके चेलन से पहलिये पौहौंच गै। 34 ईसु नईंयाँ मैं से उतरिये पाई रहै कि बड़ा जोड़ भीड़ देखी, और बाकै भीड़ ऊपर बड़ा तरस आओ, काहैकि बे उन भेंड़न हानी रहैं, जिनकी देखाभारी करन बारो कोईये ना रहै: फिर बौ उनकै निरी बात सिखान लगो। 35 जब दिन जराएक बचो, तौ बाके चेला बासे कहेन लगे, "जौ बड़ा सूनी जघा है, और दिनौ जराएक बचो है। 36 उनकै पनार दे कि बे इतै-उतै गाँव और बस्तियन मैं जाएकै कछु-कछा मोल लैकै खाएलेमैं।"
37 ईसु उनकै जबाब दई, "तुम्हईं उनकै खान कै देबौ।" बे ईसु से कहीं, "का हम दुई सौ चाँदी के सिक्का कि रोटी मोल लैकै खान कै देमैं?"
38 ईसु उनसे कही, "जाएकै देखौ तौ, तुमरे झोने कितका रोटी हैं?" फिरौंकी पूँछ-पाँछ कै बे कहीं "पाँचै रोटी और दुईये मच्छी हैं।"
39 फिर ईसु चेलन से कही, "जौ हरी-हरी घाँस मैं सबन कै लैनबार से बैठार देबौ।" 40 तभईये बे सौ-सौ, पचास-पचास करकै लैनबार से बैठत गै। 41 बौ पाँच रोटी और दुई मच्छी कै लैकै, ऊपर स्वर्ग के घाँईं देखी और धन्यवाद करी, और रोटियन कै तोड़कै चेलन कै देत गौ, ताकी बे सब जनिन ताहीं परसा परसैं, और बे दुई मच्छी सबन कै बाँट दईं। 42 सब जनी खूबै छक कै खाए लईं। 43 और फिर बाके चेला मच्छी और रोटी की बहारै छपरिया बची भईं उठाईं। 44 जित्ते जनी खाईं, उनमैं खाली लोगै-लोग पाँच हजार रहैं।