33 "अच्छो फल पान के ताहीं तुमरे झोने एक अच्छो पेंड़ होनो चाहिए; अगर तुमरे झोने खराब पेंड़ है, तौ तुमरे झोने खराब फल होंगे। काहैकि पेंड़ अपने फल से पहचानो जाथै। 34 अरे साँप के बालकौ, जब तुम बुरे होत भै अच्छी बात कैसे कह सकथौ? काहैकि जो मन मैं भरो होथै, बहे मोहों से निकरथै। 35 एक अच्छे इंसान के मन के भंडार मैं से अच्छाई इखट्टी है बहे मैं से अच्छी बात निकरथै, जबकी एक बुरो इंसान जो बुराई बाके मन मैं है बहे मैं से बुरी बात निकरथैं।
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