कोई भी दिन और घंटा नाय जानथै
36 "हालाकि, कोई ना जानथै, बौ दिन और घंटा कब आगो, ना तौ स्वर्ग मैं स्वर्गदूत, और ना लौड़ा, पर सिरफ परम दऊवा। 37 जैसी नूह के दिन रहैं, बैसिये इंसान के लौड़ा को भी आनो होगो। 38 बहाड़ से पहले के दिनन मैं आदमी खाईं-पीं, लोग और बईय्यर बिहा करीं, बहे दिन नूह बड़ी नईंय्याँ मैं गौ; 39 तहुँओं पतै नाय चलो कि बहाड़ आन ले का हुई रौ है और सबै पुही गै। ऐसोई होगो जब इंसान को लौड़ा आगो।