24 तौ एक हजार सिक्का जोकै मिले रहैं, बौ आए कै कही, ‘मालिक, मैं तोकै जानथौं कि तैं कड़क आदमी है; जब तैं पौधा ना लगाथै तहुँओं फसल काटथै, और तैं बौ फसल कै इखट्टो करथै जितै तैं बीज ना बखेरो रहै। 25 तभई मैं डराय गौ और जाएकै तेरे सिक्का जमीन मैं लुकाए दौ; देख, जो तेरो है, बौ जौ है।’
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