25 "तभई मैं तुमसे कहथौं: जिंदो रहन के ताहीं, चिंता मत करीये कि हम खांगे, और का पीमंगे, और ना अपने सरीर के ताहीं कि का पहनंगे, सबन के बाद, का ज्यान रोटी से जद्धे जरूरी नाय है? और सरीर लत्तन से बढ़कै नाय है? 26 आसमान के पक्छिन कै देखौ! बे ना तौ बीज बोथैं, नाय काटथैं, और कुठियन मैं जोड़थैं; तहुँओं तुमरो स्वर्गिय दऊवा उनकै खबाथै! का तुम बे पक्छिन से बढ़कै नाय हौ? 30 तौ जब परमेस्वर मैदान की घाँस कै, जो आज है, और कल भट्टी मैं झोंकी जागी, ऐसो लत्ता पहनाथै, तौ ओ कम बिस्वास करन बारे! का बौ तुमकै और भी जाधे ना पहनागो?" 31 "तौ चिंता मत करियो: ‘कि हम का खांगे? या का पींगे? और या का पहनंगे?’ 32 गैर यहूदि लोग जे सब चीजन के पच्छू दौड़त रहथैं लेकिन स्वर्ग मैं रहन बारो तुमरो स्वर्गिय दऊवा जानथै कि तुमकै जे सब चीजन की जरूरत है। 33 तभई जाके अलावा पहले तुम परमेस्वर के राज्य और धार्मिकता कै ढूँड़ौ तौ जे सब चीजैं तुमकै मिल जांगी। 34 तौ कल के बारे मैं चिंता मत करौ; काहैकि कल को दिन अपनी चिंता अपने आप कर लेगो; आज के ताहीं आजै को दुख भौत है।"
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