2 काहैकि तुमरो न्याय बहे फैसला के आधार होगो और जो नपना से तुम नापथौ, बहे से तुमरे ताहीं नापो जागो। 3 तैं काहे अपने भईय्या की आँखी के कूरा कै देखथै, और अपनी आँखी को लट्ठा तोकै नाय दिखथै? 4 तैं अपने भईय्या से कैसे कह सकथै, ‘ला मैं तेरी आँखी से कूरा निकार दियौं,’ जब तेरिये आँखी मैं लट्ठा है?
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