राज्य के अधिकारिन ताहीं जिम्मेदारी
1 सबै आदमी अपने आप सासकीय अधिकारियन के सुपर्त रहमैं, काहैकि कोई को अधिकार ऐसो हईये नाय जो परमेस्वर के घाँईं से ना होबै; और जो अधिकार हैं, बे परमेस्वर के बनाये भै हैं। 2 तभईये जो भी कोई अधिकार को बिरोध करथै, बौ परमेस्वर के नियम को सामना करथै, और सामना करन बारे सजा पामंगे। 3 पर सासक अच्छे काम के ताहीं नाय, पर बुरे काम के ताहीं डर को कारड़ हैं; अगर तुम अधिकारिन से डरानो नाय चाहथौ तौ अच्छे काम करौ। और जो ताहीं है बहे करौ, तौ बे तुमरी बड़ाँईं करंगे, 4 काहैकि बौ तेरी भलाई ताहीं परमेस्वर को सेवा करन बारो है। लेकिन अगर तैं बुरे काम करथै तौ-तौ डरा, काहैकि बे तलवार खालिमूलि मैं नाय लै हैं; और परमेस्वर की सेवा करन बारे सेवक हैं कि बाके गुस्सा से बुरे काम करन बारेन कै सजा देबै। 5 तभईये अधिकारिन के सुपर्त मैं रहनो नाय सिरफ बाके गुस्सा के डर से जरूरी है, बल्किन विवेक भी जहे गभाई देथै।
6 तभईये चुंगी13:6 टैक्स भी देबौ काहैकि सासन करन बारे परमेस्वर की सेवा करन बारे हैं और हमेसा जहे काम करत रहथैं। 7 जहे बजह से उनको कर्तव्य उनकै दे करौ; जोकै चुंगी चहाईये बाकै, चुंगी देबौ; जोसे डरानो चहाईये, बासे डराबौ; जोको आदर करनो चहाईये, बाको आदर करौ।