नियम और पाप
7 7:7 निर्गमन 20:17; व्यवस्थाविवरन 5:21 तौ हम का कहमैं? फिरौंकी का नियमै पापी है? कतईये नाय! बल्किन बगैर नियम के मैं पाप कै जानिए ना सकथौं। अगर नियम कहतो कि "जो कोई और कोई को है बाकी इच्छा मत करै," तौ मैं ऐसी इच्छा कै जानतोई नाय। 8 लेकिन बौ आग्या के जरिया पाप मेरे मैं सबै तरह की लालची इच्छन कै जगान को मौका पाई। काहैकि बगैर नियम के तौ पाप मरो भौ है।
17 तौ ऐसे हालत मैं बाकै करन बारो मैं नाय, बल्किन बौ पाप है जो मेरे भीतर है। 18 मैं जानथौं, कि मेरे सरीर के भीतर कोई अच्छी चीज नाय बास करथै, मन तौ मेरो होथै, भलेई अच्छो करन की इच्छा मेरे मैं है, लेकिन भले काम मोसे होतै ना हैं। 19 काहैकि जो अच्छो काम करन को मेरो मन होथै, बौ तौ मैं करतै नाय हौं, लेकिन जो खराब काम के ताहीं मन नाय करथै, बहे काम करथौं। 20 अगर मैं बे काम करथौं जोको मेरो मन नाय करथै, जाको मतलब बे काम कै करन बारो मैं नाय रहौं, लेकिन पाप जो मेरे भीतर है बहे जे काम करथै।
23 लेकिन मोकै मेरे सरीर के हिस्सन मैं कुछ अलगै जैसो नियम दिखाई देथैं, जो मेरे अकल के नियम से लड़थैं और मोकै पाप के नियम के भँदना मैं डरात रहथैं जो मेरे सरीर के हिस्सन मैं हैं।