26 ऐसियै आत्मौ हमरी कमजोरी मैं मदत करथै, काहैकि हम जानतै ना हैं, कि प्रार्थना कैसे करकै करनो चाहिए; आत्मा खुदै ऐसे आँह भर-भरकै जो बखान करन से परे है, हमरे ताहीं मिन्नत करथै।
28 और हमउँ जानथैं, कि जो आदमी परमेस्वर से प्यार करथैं, उनके ताहीं सबै बात मिलकै भलाइये पैदा करथैं; मतलब उन्हईं के ताहीं जो बाकी इच्छा से बुलाए भै हैं।